Malegaon Blast Case : मालेगांव ब्लास्ट मामले में मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के थे आदेश: ATS अधिकारी महबूब मुजावर के नए विस्फोटक खुलासे


Malegaon Blast Case : 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव बम ब्‍लास्‍ट के मामले में पूर्व एटीएस ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्‍हें आरएसएस प्रमुख को गिरफ्तार करने के आदेश मिले थे।


Malegaon Blast Case : 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए सीरियल धमाकों में छह लोगों की मौत हुई थी और लगभग सौ से अधिक घायल हुए थे। प्रारंभिक जांच महाराष्ट्र की एंटी‑टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने की, लेकिन बाद में यह केस NIA को सौंप दिया गया था। 17 वर्षों की लंबी जाँच‑प्रक्रिया और 10,800 से अधिक सबूतों, 323 गवाहों के हवाले अदालत ने हाल ही में सभी आरोपियों — जिसमें प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित भी शामिल थे — को बरी कर दिया है ( आपको बता दें कि सभी आरोपियों को सबूतों की कमी के आधार पर निर्दोष करार दिया गया) ।

मुजावर का नया दावा:
Malegaon Blast Case : 10 वर्षों से अधिक पहले मामले की प्रारंभिक ATS टीम का हिस्सा रहे पूर्व ATS सहायक निरीक्षक महबूब मुजावर ने दावा किया है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया था । उनके अनुसार, ATS के तत्कालीन प्रमुख परमबीर सिंह ने उन्हें यह आदेश दिया था।

मुजावर ने स्पष्ट किया कि यह आदेश ‘भगवा आतंकवाद’ (Saffron Terror) की थ्योरी को साकार करने के उद्देश्य से दिया गया था । यह आक्रामक कथन मानता है कि जांच एजेंसी को राजनीतिक उद्देश्यों से मार्गदर्शन मिला। उन्होंने कहा:

“मैंने आदेश का पालन नहीं किया क्योंकि मुझे यह अतर्किक और अनुचित लगा”

“जिसका दबाव नहीं माने, उसको डराकर झूठे केस भी दर्ज किए गए। परिणामस्वरूप मेरा 40‑साल का पेशेवर जीवन बर्बाद हो गया” ।

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एमबीए परीक्षण: ATS की ‘फर्जी जांच’
मुजावर का यह दावा अदालत के फैसले से पहले नहीं था, लेकिन अब विशेष NIA न्यायालय की ओर से ATS की प्रारंभिक जांच को फर्जी बताया गया है । अदालत ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुटा सका, इसलिए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया गया।

पुरोहित ने अदालत के बाहर कहा:

“मैंने अपने देश के खिलाफ कुछ भी नहीं किया… मेरे कैरियर की सुनहली अवधि खो गई… मेरी पत्नी, बच्चे सब मुश्किलों में रहे” ।

प्रज्ञा ठाकुर ने भावुक होकर अदालत में कहा:

“यह भगवा की विजय है… जिसने हमारे साथ गलत किया, ईश्वर उन्हें कभी क्षमा न करें” ।

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Malegaon Blast Case : राजनीतिक एवं सामाजिक प्रभाव
इस नयी जानकारी ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस, NCP सहित विपक्षी दलों ने पहले भी “हिंदुत्व या भगवा आतंकवाद” की थ्योरी का समर्थन किया था, जबकि BJP ने विवाद को हिंदू विरोध प्रदर्शन बताया था। अब NIA कोर्ट के फैसले बाद BJP ने विपक्ष से माफी की मांग की है, जबकि अन्य दल सतर्क परिवर्तनों पर विचार कर रहे हैं ।

महबूब मुजावर की प्रमाण‑याचना:
मुजावर ने यह भी दावा किया कि उनके पास दस्तावेजी प्रमाण है जो न केवल उन क्रियाओं की पुष्टि करता है बल्कि ATS की कथित ‘रैखिक दिशा’ को भी दर्शाता है। यदि ठीक से जाँचा जाए, तो इन दावों से व्यापक जांच की राह खुल सकती है ।


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Malegaon Blast Case : निष्कर्ष

ATS द्वारा मोहन भागवत की गिरफ्तारी का आदेश — जैसा कि पूर्व ATS अधिकारी महबूब मुजावर ने बताया — मालेगांव जांच के चरित्र को संदिग्ध बनाता है। अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने और ATS की जांच पर सवाल उठने के बाद अब यह मामला राजनीति, न्यायपालिका, और जांच एजेंसियों के बीच एक निर्णायक मोड़ पहचानता है। आगे अब इस पूरे दावे पर स्वतंत्र जांच या सचेत साक्ष्य‑समर्थन की आवश्यकता है।


महत्‍वपूर्ण फैक्‍ट्स :

एटीएस का आदेश: मोहन भागवत की गिरफ्तारी के निर्देश देने वाले मुख्य ATS अधिकारी परमबीर सिंह द्वारा आदेश

उद्देश्य: ‘भगवा आतंकवाद’ की कहानी को स्थापित करना

मुजावर का अनुभव: आदेश न मानने पर झूठे मुकदमे, करियर बर्बादी

अदालत निर्णय: सभी आरोपियों को बिना पर्याप्त साक्ष्यों बरी किया गया

राजनीतिक तर्ज: BJP ने विपक्ष से माफी मांगी, विपक्ष सतर्क

आगे की दिशा: स्वतंत्र जांच एवं सत्यापन की आवश्यकता


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