Iran Israel War : तीसरे विश्व युद्ध (World War 3 )की आहट ! भारत खड़ा होगा इस देश के साथ…..

Iran Israel war : 2025 में दुनिया जिस चीज़ से सबसे ज्यादा डरती थी, वह अब हकीकत में बदलने के करीब है — तीसरा विश्व युद्ध।ईरान और इज़राइल के बीच शुरू हुआ यह तनाव एवं युद्ध स्थिति तेजी से वैश्विक रूप ले रहा है। एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी देश इजरायल से साथ हैं तो वहीं दूसरी तरफ ईरान को चीन और रूस का समर्थन मिल रहा है।

क्या बन सकता है ईरान-इज़राइल युद्ध से तीसरा विश्व युद्ध ?

  1. बड़ी शक्तियों की इज़राइल को अमेरिका, फ्रांस, यूके जैसे देशों का खुला समर्थन है। वहीं ईरान को रूस और चीन जैसे ताकतवर देशों का कूटनीतिक और सैन्य समर्थन मिल रहा है। यदि युद्ध और बढ़ा, तो ये देश सीधे युद्ध में उतर सकते हैं।
  2. तेल व्यापार और समुद्री रास्तों पर अज़रबैजान और इज़राइल के टकराव से पारस की खाड़ी (Persian Gulf) और होर्मुज की खाड़ी का व्यापार प्रभावित हो सकता है।यह दुनिया की सबसे व्यस्त तेल आपूर्ति लाइन है। अगर यहां रुकावट आई तो अमेरिका और उसके सहयोगी कार्रवाई करने को मजबूर हो सकते हैं।
  3. ईरान पर ज्यादा दबाव बना तो सीरिया, लेबनान, यमन जैसे कई मुस्लिम देश उसके समर्थन में उतर सकते हैं।इससे पूरे मध्य पूर्व में युद्ध की आग फैल जाएगी, और वैश्विक तकरार का रूप ले सकती है।
  4. इज़राइल के पास पहले से ही परमाणु हथियार हैं, और ईरान पर भी ऐसे कार्यक्रम चलाने के आरोप हैं।यदि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हुआ, तो यह युद्ध मानवीय इतिहास की सबसे बड़ी तबाही बन सकता है।

भारत किस ओर होगा?

भारत की स्थिति बहुत संवेदनशील है। आइए जानते हैं प्रमुख कारणों को –

1. अमेरिका और इज़राइल से मजबूत संबंध भारत के अमेरिका और इज़राइल से रक्षा, तकनीक और व्यापार के गहरे संबंध हैं। इज़राइल भारत को रक्षा उपकरण और आधुनिक तकनीक सप्लाई करता है।

2. ईरान से ऊर्जा और रणनीतिक रिश्ते भारत ईरान से सस्ती दरों पर तेल खरीदता रहा है। चाबहार पोर्ट के ज़रिए भारत ने अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाई है।

3. भारत की संतुलित नीति भारत अक्सर ऐसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर “रणनीतिक संतुलन” बनाए रखता है। युद्ध की स्थिति में भारत शुरुआत में किसी एक पक्ष का खुला समर्थन नहीं करेगा, बल्कि शांति की अपील करेगा लेकिन यदि बात वैश्विक स्तर पर दो गुटों में बंटने की आई तो भारत अमेरिका-इज़राइल गुट के करीब रहेगा, क्योंकि चीन और पाकिस्तान ईरान के पक्ष में जा सकते हैं,और भारत पहले से ही चीन-पाक गठजोड़ से चिंतित है।

ईरान-इज़राइल युद्ध अब सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा।इसके पीछे छिपी वैश्विक शक्तियों की भागीदारी और राजनीतिक एजेंडा इसे तीसरे विश्व युद्ध की नींव बना सकता है।भारत इस जटिल परिस्थिति में अपनी कूटनीति, राष्ट्रीय हित और वैश्विक भूमिका को ध्यान में रखकर ही कदम बढ़ाएगा। इस युद्ध का अंत तभी संभव है जब दुनिया की बड़ी शक्तियाँ अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएं और शांति को प्राथमिकता दें। वरना ये आग पूरी दुनिया को जला सकती है।

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