Nepal social media ban 2025 : प्रतिबंध के खिलाफ ‘ Gen-Z’ ने सड़कों पर उतरकर अपने आज़ादी के लिए व्यापक और हिंसक विरोध प्रदर्शन किया। सरकार ने 26 प्रमुख सोशल मीडिया ऐप्स पर पाबंदी लगाई, जिससे युवाओं में गहरा आक्रोश फैला। पुलिस और सेना ने कर्फ्यू और कड़ी कार्रवाई की, जिसके चलते कई लोग मारे गए और घायल हुए। गृहमंत्री ने इस्तीफा दिया, जबकि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस्तीफे की मांग तेज हुई।
Nepal social media ban 2025 काठमांडू, नेपाल : सितंबर 2025 में नेपाल में उस वक्त हलचल मच गई जब, सरकार ने अचानक 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। इस फैसले ने पूरे देश fकी ‘ Gen-Z’ युवा को हिला कर रख दिया और फिर सारे देशभर में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया प्रतिबंध तक सीमित न रहकर युवाओं की फ्रीडम ऑफ स्पीच, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे व्यापक मुद्दों से जुड़ गया।
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प्रतिबंध का कारण और पृष्ठभूमि
Nepal Gen Z protests : नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, ट्विटर, मैसेंजर समेत कुल 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगाया, चूंकि ये कंपनियां नेपाल के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराईं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अनरजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया था, और सरकार ने इसे लागू कर दिया। सरकार का दावा था कि इस कदम से अफवाहों, गलत जानकारी और नफरत फैलाने वाली सामग्री पर नियंत्रण पाया जा सकेगा, लेकिन युवाओं ने इसे अपने बोलने और आवाज उठाने की स्वतंत्रता पर हमला माना।
कहां से हुई विरोध प्रदर्शन की शुरुआत ?
Nepal corruption protests : सरकार के इस फैसले के खिलाफ मुख्य रूप से युवाओं और छात्रों ने मोर्चा संभाला। 8 सितंबर 2025 को काठमांडू के बीचों-बीच और आसपास के कई शहरों में हजारों ‘ Gen-Z’ के युवा सड़कों पर उतर आए। ये सभी युवा अपनी आज़ादी की रक्षा के लिए इकट्ठा हुए और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ जोरदार नारेबाज़ी की। युवा वर्ग के साथ-साथ आम जनता भी भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दों पर नाराज़गी जाहिर कर रही थी, जिसने विरोध को और बढ़ावा दिया।
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हुई कई मौतें
विरोध प्रदर्शन शुरुआत में शांतिपूर्ण नजर आ रहा था, लेकिन तेजी से भड़कता चला गया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन के करीब पहुँचकर सुरक्षा घेरों को तोड़ा और संसद परिसर में घुसने का प्रयास किया। पुलिस ने विरोध को दबाने के लिए आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर की गोलियों का सहारा लिया। इस हिंसक संघर्ष में अब तक 19 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 350 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई स्थानों पर सेना को तैनात करना पड़ा और कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया।
इस प्रदर्शन ने नेपाल की राजनीतिक जमीन हिला दी है। युवा वर्ग के गृहमंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दे दिया। सरकार के फैसले और विरोध प्रदर्शन से प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की प्रतिष्ठा पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। विपक्षी दल इस मुद्दे का फायदा उठाते हुए सरकार को घेरने में जुटे हैं। देश में राजनीतिक अस्थिरता के संकेत बढ़ते जा रहे हैं।
आगे के रास्ते
नेपाल सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह या तो सोशल मीडिया बैन को वापस लेकर युवाओं की मांगें माने, या फिर यह आंदोलन और अधिक तीव्र हो सकता है। सोशल मीडिया को नियंत्रित करने की सरकार की कोशिशें तभी सफल हो पाएंगी जब युवाओं के विश्वास और आवाज़ को सम्मान मिलेगा। यह आंदोलन पूरे देश में फैल रहा है और आने वाले समय में इसका असर राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक ढांचों पर भी पड़ने वाला है।
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