शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष मिशन : भारत के अंतरिक्ष यात्री और वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला हाल ही में 18 दिनों की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर पृथ्वी पर लौटे हैं। Axiom-4 मिशन के तहत उन्होंने वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयोगों में भाग लिया, जो मानवता के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। उन्होंने इस मिशन को पूरा कर पूरे भारतवर्ष को गौरवान्वित किया है। यह संपूर्ण भारत के लिए गौरव का क्षण रहा है।
2025 में, जब दुनिया स्पेस एक्सप्लोरेशन के नए दौर में कदम रख रही है, तब शुभांशु शुक्ला का नाम एक नई दिशा की ओर बढ़ते हुए नजर आता है। उनका Axiom 4 मिशन, जिसे कई लोग सिर्फ एक सफलता नहीं, बल्कि एक आगे बढ़ने का जरिया मान रहें हैं। Axiom 4 मिशन की सफलता के बाद, शुभांशु शुक्ला का नाम अंतरिक्ष विज्ञान और एक्सप्लोरेशन में एक मिसाल बन गया है। उन्होंने एक नए युग की शुरुआत की है।

वापसी की कहानी: अंतरिक्ष में समय का अनुभव
Axiom 4 मिशन की वापसी पर, शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष के अपने सुनहरे अनुभवों को सबके साथ बांटा । उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में समय का गुजरना एक अलग ही अनुभव होता है। जब हम पृथ्वी से दूर, अंतरिक्ष में कहीं होते हैं, तो वक्त के हर पल में हम एक नई दुनिया में सैर कर रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि “अंतरिक्ष में रहकर खुद को समझना और एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना, हमारे लिए एक सबसे बड़ा लर्निंग एक्सपीरियंस था,” ।

अंतरिक्ष में हैं अनंत संभावनाएं :
शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष मिशन : Axiom 4 मिशन के बाद, शुभांशु और उनकी टीम ने स्पेस टूरिज़्म की दुनिया में नए रास्ते खोल दिए हैं। अब दुनिया भर के लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष की ओर रुख कर रहे हैं। shubhanshu shukla का कहना है कि स्पेस एक्सप्लोरेशन की दुनिया अब सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है। यह दुनिया अब सभी के लिए खुली है, और यह एक ग्लोबल मूवमेंट बन चुका है।

परिवार से मिल हुए भावुक :
अंतरिक्ष में लगभग दो हफ्तों के बाद, जब Shubhanshu shukla पहली बार अपने परिवार से मिले, तो यह पल न केवल उनके लिए, बल्कि उनके परिवार के लिए भी बेहद भावनात्मक था। कई दिनों तक अपने परिवार से दूर रहकर, एक ऐसे माहौल में जहां हर दिन एक नई मुश्किल आपका इंतजार कर रही होती है। वापसी पर जब वे अपनी पत्नी और बच्चों से मिले, तो वह एक पल था जो उनके जीवन का सबसे खास और भावुक क्षण बन गया।
शुभांशु शुक्ला ने उस पल के बारे में बताते हुए कहा “जब मैं अंतरिक्ष से लौटा और अपने परिवार के पास पहली बार पहुंचा, तो वह एहसास शब्दों में बयां करना मुश्किल है । “वो पल, जब मैंने अपनी पत्नी और बच्चों को गले लगाया, मुझे एहसास हुआ कि मेरे इस मिशन का असली मकसद क्या था – अपने परिवार और पूरे भारतवर्ष के लिए कुछ नया करना।”
उनकी पत्नी और बच्चे, जो लंबे समय से उनके लौटने का इंतजार कर रहे थे, उस दिन की खुशी को कभी भी भूल नहीं पाएंगे। उनके परिवार का कहना है कि इस मिशन की सफलता ने न सिर्फ उन्हें गर्व महसूस कराया, बल्कि उनके लिए एक नए मोटिवेशन भी बने । शुभांशु की पत्नी ने कहा “मैं बहुत गर्व महसूस करता हूं कि मेरे पति ने ऐसा अद्भुत काम किया। वह सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं, बल्कि मेरे लिए एक प्रेरणा हैं,”।
उनके बच्चों ने भी अपने पिता के वापस लौटने पर जो खुशी महसूस की, उसे शब्दों में कहना मुश्किल था। यह वह पल था, जब एक परिवार ने अपने सबसे प्यारे मेंबर को गले लगाया, जो अपने काम और देश के लिए अपनी निजी जिंदगी से दूर था।
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